भारतीय शिक्षा
मनुष्य में जो संपूर्णता सुप्त रूप से विद्यमान है उसे प्रत्यक्ष करना ही शिक्षा का कार्य है। स्वामी विवेकानन्द                      There are no misfit Children, there are misfit schools, misfit test and studies and misfit examination. F.Burk                     शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य आंतरिक शक्तियों को विकसित एवं अनुशासित करने का है। डॉ. राधा कृष्णन                      ज्ञान प्राप्ति का एक ही मार्ग है जिसका नाम है, एकाग्रता और शिक्षा का सार है मन को एकाग्र करना। श्री माँ

चरित्र निर्माण और व्यक्तित्व के समग्र विकास

”चरित्र निर्माण और व्यक्तित्व के समग्र विकास” की शिक्षा की ओर आगे बढ़ते कदम – अतुल कोठारी
वर्ष 2007 मार्च से शिक्षा बचाओ आन्दोलन द्वारा यौन (सैक्स) शिक्षा के विरूध्द में आन्दोलन छेड़ा गया था। जून-2007 में केन्द्र सरकार ने इसको लागू किया। जुलाई 2007 दिल्ली के मावलंकर हाल में आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन में देश के विभिन्न सम्प्रदायों के प्रमुखों सहित 28 संस्थाओं के प्रतिनिधि तथा विभिन्न राजनीतिक पक्षों के नेता सम्मितल हुए। दिसम्बर 2007 में राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन ने यौन शिक्षा के पाठयक्रम हेतु 6 लोगों की समिति का गठन किया। फरवरी 2008 में केन्द्र सरकार के मानव संसाधन विकास मंत्री ने भी हम यह पाठयक्रम नहीं पढ़ाना चाहते कहते हुए अपने पैर वापस खीचें। 17 मार्च 2007 को अपने द्वारा राज्यसभा की याचिका (पेटिशन) समिति को याचिका दी गई। याचिका समिति ने देश के सात बड़े महानगरों में सुनवाई की उसमें उनको 40 हजार से अधिक ज्ञापन प्राप्त हुए। शिक्षा बचाओ आन्दोलन के द्वारा भी 4 लाख 15 हजार हस्ताक्षर युक्त आवेदन पत्र दिया गया। 21, 22 फरवरी 2009 को यौन शिक्षा के विकल्प हेतु पूणे (महाराष्ट्र) में राष्ट्रीय स्तर का परिसंवाद शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास द्वारा आयोजित किया गया। परिसंवाद के अंत में विकल्प का एक प्रारूप बना तथा पाठयक्रम समिति का गठन किया गया। 2 अप्रैल 2009 को राज्यसभा की पेटिशन समिति ने अपनी रिपोर्ट राज्यसभा के सभापति एवं देश के उपराष्ट्रपति को सुप्रत किया उन्होंने रिपोर्ट पर अपने हस्ताक्षर किये। 9 जून 2009 कों रिपोर्ट राज्यसभा के पटल पर रखी गई।
पेटिशन समिति में कई पक्षों के सांसद थे। सबने सर्वसम्मति से रिपोर्ट पारित किया जिसमें उन्होंने कहा कि यौन शिक्षा के बदले ”चरित्र निर्माण एवं व्यक्तित्व के विकास” की शिक्षा दी जाए।
अपने द्वारा गठित पाठयक्रम समिति ने संसद की समिति के रिपोर्ट एवं पूणे परिसंवाद के विकल्प के प्रारूप के आधार पर अगस्त 2009 में देश के समक्ष ”चरित्र निर्माण एवं व्यक्तित्व के समग्र विकास” का प्रस्तावित पाठयक्रम प्रस्तुत किया। इस पाठयक्रम पर चर्चा हेतु निम्नप्रकार से देशभर में छ: परिसंवादों का आयोजन हुआ।
स्थान दिनांक संख्या सम्मिलित राज्य उपस्थित विशेष अतिथि

रांची 2अगस्त09 86 04 मा. दतात्रेय होसबले (सह सरकार्यवाह रा. स्व. संघ)

अलीगढ़ 23अगस्त09 60 02

चंडीगढ़ 30अगस्त09 326 07 श्री प्रेम कुमार धूमल, (मुख्यमंत्री, हि.प्र.)
श्री प्रकाशसिंह बादल,(मुख्यमंत्री, पंजाब)

इन्दौर 13सितम्बर09 124 03 सुश्री अर्चना चिटनीस, (शिक्षा मंत्री, मध्यप्रदेश)
श्री वृजमोहन अग्रवाल,(शिक्षा मंत्री, छत्तीसगढ़)

धारवाड 24अक्टूबर09 126 02 उध्दाटन : श्री जगदीश शेट्टर
(अध्यक्ष, कर्णाटका विधान सभा)

दिल्ली 31अक्टूबर09 398 01 श्री लक्ष्मी निवास झुनझुनवाला
(उपाध्यक्ष, रामकृष्ण मठ)
श्री जोगिन्दर सिंह,(पूर्व निदेशक,सी.बी.आई)

इन परिसंवादों में विभिन्न सामाजिक एवं शैक्षिक संस्थाओं के अधिकारी, विद्यालयों के प्रबंधक, शिक्षक, अभिभावक और छात्रों की सहभागिता रही। परिसंवादों में आने वाले सभी प्रतिभागीयों को पूर्व से पाठयक्रम की पुस्तक उपलब्ध कराने का प्रयास किया गया था, अपेक्षा की गई थी कि आनेवाले प्रतिभागी पाठयक्रम का अध्ययन करके सुझाव लेकर आए। इस प्रयास में अच्छी सफलता भी मिली। इन परिसंवादों से आए सुझावों को लेकर दिनांक 1 नवम्बर 2009 को पाठयक्रम समिति की बैठक कर्णावती (अमदाबाद) में सम्पन्न हुई। जिसमें सारे सुझावों पर विचार करते हुए आवश्यक सुझावों को सम्मिलत करके दिसम्बर अंत तक पाठयक्रम की एक नई पुस्तक तैयार की जाएगी। इसके साथ ही इस पाठयक्रम को सरकारी एवं निजी स्तर पर स्वीकार्यता प्राप्त हो इस हेतु भी प्रयास किया जा रहा है। अभी तक हिमाचल प्रदेश एवं पंजाब के मुख्यमंत्रियों ने यौन शिक्षा के बदले ”योग शिक्षा” लागू करने की घोषणा की है। इस प्रकार उत्तार प्रदेश सरकार ने सैक्स एज्युकेशन के बदले ”हैल्थ एज्यूकेशन” लागू करने की घोषणा की है। मध्यप्रदेश एवं छत्ताीसगढ़ सरकार के शिक्षा मंत्रियों ने नये पाठयक्रम को लागू करने का आश्वासन दिया है। यह पाठयक्रम तैयार होने के बाद प्रयोग के तौर पर कुछ निजी विद्यालयों को चिन्हृित करते हुए वहां समग्रता से प्रयोग करने भी योजना बनाई जा रही है। साथ ही देश में ”चरित्र निर्माण एवं व्यक्तित्व के समग्र विकास” की शिक्षा हेतु एक केन्द्र की स्थापना की योजना भी है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *