भारतीय शिक्षा
मनुष्य में जो संपूर्णता सुप्त रूप से विद्यमान है उसे प्रत्यक्ष करना ही शिक्षा का कार्य है। स्वामी विवेकानन्द                      There are no misfit Children, there are misfit schools, misfit test and studies and misfit examination. F.Burk                     शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य आंतरिक शक्तियों को विकसित एवं अनुशासित करने का है। डॉ. राधा कृष्णन                      ज्ञान प्राप्ति का एक ही मार्ग है जिसका नाम है, एकाग्रता और शिक्षा का सार है मन को एकाग्र करना। श्री माँ

प्रारूप – शिक्षा में अल्पसंख्यक तुष्टीकरण

राष्ट्रीय संगोष्ठी

दिनांक 27, 28, जून 2009

भारत में अल्पसंख्यक, संवैधानिक, जनांकिकीय एवं सामाजिक पक्ष

स्थान:- आई.सी.एस.एस.आर कॉम्पलेक्स, पंजाब विश्वविद्यालय (चंडीगढ़)

श्री अतुल कोठारी

(सह-सचिव, शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास)

जी ब्लाक, नारायणा विहार,, नई दिल्ली-110028

फोन:- 9868100445, ईमेल :- atulabvp@rediffmail.com

प्रारूप – शिक्षा में  अल्पसंख्यक तुष्टीकरण

विश्व के अनेकों देशों में अल्पसंख्यक, बहुसंख्यक का संधर्ष इसलिए चलता है कि वहां अल्पसंख्यकों को अन्याय होता है या द्वितीय दर्जे के नागरीक जैसा व्यवहार होता है। श्रीलंका में शुरू में समान अधिकार हेतु ही वहां के तमिलों ने संधर्ष शुरू किया था, इसी प्रकार मलेशिया में भी वही स्थिति वहां के हिन्दुओं की है इस हेतु  संधर्ष हो रहा है। उससे भी भयावह स्थिति पाकिस्तान और बंगलादेश में है वहां के निवासी हिन्दूओं पर भयानक अत्याचार किये जा रहे है जिस कारण से वहां के हिन्दू उन देशों से पलायन करके भारत में निर्वासित जीवन जीने को मजबूर है। लेकिन भारत विश्व का एक अपवाद रूप देश है जहां अल्पसंख्यकों को बहुसंख्यक समाज से अधिक अधिकार प्राप्त है इस कारण से बहुसंख्यक समाज समान अधिकार हेतु संधर्षरत है लेकिन समान नागरिक कानून जैसी मांग करने वाले को साम्प्रदायिक कहकर बदनाम करने का प्रयास किया जा रहा है। अल्पसंख्यक तुष्टिकरण की वकालत करने वाले सैक्यूलर माने जाते है।

इसी प्रकार शिक्षा के क्षेत्र में भी वहीं चित्र देखने को मिलता है। स्वतंत्रता के बाद जब संविधान बना तब धारा 29, 30 के तहत अल्पसंख्यक शैक्षिक संस्थानों की स्थापना हेतु विशेष अधिकार दिया गया।  जिसकें तहत भाषकीय तथा पांथिक दोनो प्रकार के लोगों को संरक्षण प्राप्त है। यह धाराएँ बहुत स्पष्ट न होने के कारण धीरे-धीरे इसका दुरूपयोग भी बढ़ता जा रहा है। देश की उच्चतम न्यायालय, केन्द्र सरकार, राज्य सरकारें इसकी स्पष्टता हेतु एक दूसरे पर जिम्मेदारी डाल रहे है लगता है की कई देश की न्याय व्यवस्था भी तुष्टिकरण के प्रभाव में तो नहीं आ गई। आज यह दोनों प्रकार के वर्ग या उनके नाम पर अन्य वर्ग इस धारा का भरपूर दुरूपयोग कर रहे है उदाहरण किसी संस्था में मात्र नाम हेतु एक अल्पसंख्यक व्यक्ति न्यास में है वहां विद्यार्थी, शिक्षक, न्यासी सबमें अन्य वर्ग ही अधिक होने के बावजूद वह संस्थान को अल्पसंख्यक का दर्जा प्राप्त है। वर्ष 2004 जब से कांग्रेस के नेतृत्व वाली स.प्र.ग सरकार आयी है तब से देश की सरकारों में अल्पसंख्यकवाद की होड़ लगी हुई है लेकिन इसके विरूध्द कोई भी राजनैतिक पक्ष या देश के न्यायालय भी कुछ भी बोलने से कतरा रहे है। जिसका काला चिठ्ठा इस प्रारूप में सम्मिलित है।

v           एन.सी.ई.आर.टी. की इतिहास की पुस्तकों के अंश

ü       सामाजिक विज्ञान भाग-1 मध्यकालीन भारत कक्षा -7, पाठय पुस्तक की लेखिका – रोमिला थापर

पृष्ठ –4 – अकबर राजपूतों के साथ मित्रता का संबध स्थापित करने के लिए उत्सुक था। अपने परिवार और विभिन्न राजपूतों के राजपरिवारों के साथ वैवाहिक संबंध स्थापित करके उसने इस मित्रता को स्थापित करने का एक उपाय खोजा। उसने स्वंय अनेक राजकुमारियों के साथ विवाह किए। राजपूतों के साथ संधि करने और मित्रता स्थापित करने की इस नीति से उसकी स्थिति बड़ी सुदृढ़ हो गई।

पृष्ठ-5 –सातवें गुरू की मृत्यु के पश्चात् औरंगजेब ने गुरूओं के उत्ताराधिकार के झगड़े से फायदा उठाने का प्रयत्न किया।

ü       आधुनिक भारत, समाजिक विज्ञान भाग-1 कक्षा- आठवी, लेखक : अर्जुन देव, इंदिरा अर्जुन देव

पृष्ठ-200 –गरम दल के कुछ हिन्दू नेताओं ने राष्ट्रीयता के प्रचार के लिए धार्मिक विश्वास और उत्सवों का इस्तेमाल किया। इसमें अंग्रेज हिमायती मुसलमानों को यह कहने का मौका मिला कि राष्ट्रीय आन्दोलन केवल हिन्दुओं का आन्दोलन है और मुसलमानों को इससे कोई सरोकार नहीं रखना चाहिए।

ü       मध्यकालीन भारत, ग्यारहवीं कक्षा के लिए इतिहास की पाठय पुस्तक, लेखक : प्रो. सतीश चन्द्र

पृष्ठ-316 – अपने पूर्ववर्ती शहंशाहों के विपरीत, औरंगजेब को आडंबर और तामझाम पसंद नहीं था। उसका व्यक्तिगत जीवन बहुत सादा था। उसकी ख्याति एक कट्टरतावादी और ईश्वर से डरने वाले मुसलमान के रूप में थी। कालांतर में उसे ”जिदा पीर” कहा जाने लगा था।

पृष्ठ- 328 –यह भी कहा जाता है कि औरंगजेब गुरू से इसलिए नाराज था कि उसने कुछ मुसलमानों को सिख बना लिया था। एक परंपरा यह भी कहती है कि गुरू ने कश्मीर के स्थानीय गर्वनर के खिलाफ जो वहाँ के हिंदुओं पर धार्मिक अत्याचार कर रहा था, आवाज उठाई थीं। किंतु हिंदुओं के साथ धार्मिक अत्याचार का उल्लेख कश्मीर के किसी इतिहास में नहीं मिलता है।

पृष्ठ –330 –यह बात संदिग्ध है कि गुरू के दो बेटों के साथ वह नृशंस व्यवहार वजीर खाँ ने औरंगजेब के कहने पर किया। मालूम होता है, औरंगजेब गुरू का विनाश नहीं चाहता था और उसने लाहौर के सूबेदार को उसे ” समझा-बुझाकर रास्ते पर लाने” के लिए एक पत्र लिखा था।

पृष्ठ –337 – अफजल खांँ और शिवाजी पहले भी कई बार धोखेबाजी का सहारा ले चुके थे।

पृष्ठ –341 –औरंगजेब मराठों से दोस्ती को कोई अहमियत नहीं देता था। उसके लिए शिवाजी एक ”मामूली भूमिया” (जमींदार) था।

पृष्ठ- 356 – औरंगजेब का दृष्टिकोण रूढ़िवादी था और उसने इस्लामी कानून की मर्यादाओं के अंदर रहने का प्रयत्न किया।

पृष्ठ –328 –हल्दीघाटी की लड़ाई हिंदुओं और मुसलमानों या भारतीयों और विदेशियों के बीच की लड़ाई  नहीं थी।

ü      आधुनिक भारत, कक्षा 12 के लिए पाठयपुस्तक, लेखक -विपिन चन्द्र

पृष्ठ – 20 –रणजी सिंह अपने सिंहासन से उतरकर मुसलमान फकीरों के पैरों की धूल अपनी लंबी सफेद दाढ़ी से झाड़ता था।

ü       एनसीईआरटी  की हिन्दी की पुस्तक मे फिदा हुसैन की आत्मकथा पढ़ाई जा रही है।

ü     एनसीईआरटी की नई पुस्तकों में

– कक्षा -7 ”अवर पास्ट-2 (हमारा अतीत-2)

इस पुस्तक के 154 पेज में मात्र 5 लाईन छत्रपति शिवाजी महाराज के संदर्भ में है। 60 पेज मुगल इतिहास के बारे में है।

– विवादास्पद सच्चर समिति की अनुशंसाओं को राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंन्धान व प्रशिक्षण परिषद् के

आठवीं कक्षा के पाठयक्रम में सम्मिलत किया है।

ü         मुक्त अध्ययन विद्यालय (दिल्ली विश्वविद्यालय)

बी.ए. (पास) – इतिहास, वर्ष -द्वितीय, पश्न पत्र –2, अध्ययन सामग्री –3 (22-33)

  • मुसलमानों को सांप्रदायिकता की ओर ढकेलने में कांग्रेस के एक हिस्से का खुद हाथ था। यह ठीक है कि एक संगठन के रूप में कांग्रेस एक धर्म निरपेक्ष संस्था थी लेकिन इसके मेम्बरों की एक बड़ी तादाद उन लोगों की थी जो रूढ़िवादी थे ओर हिन्दू धार्मिक भावनाओं से प्रभावित थे। खुद गांधी जी के धर्म निरपेक्षता के सिध्दांत का आधार वैज्ञानिक नहीं था। रामराज्य के रूप में स्वराज्य की उनकी व्याख्या मुसलमानों को उत्साहित न कर सकी। राजनैतिक तौर पर पिछड़े हुए मुसलमानों में इस तरह की हिन्दू धार्मिक भावनाओं ने अलगाव की प्रवृत्तिा को हवा दी।
  • मुसलमानों के अंदर सांप्रदायिक भावनाओं को बढ़ाने में हिन्दू सांप्रदायिक शक्तियों का भी बहुत बड़ा हाथ रहा है।
  • हिन्दू महासभा की स्थापना के बाद इसकी ओर से मुसलमानों के खिलाफ भंयकर प्रचार किया जाने लगा।
  • एक और हिन्दू साम्प्रदायिक संगठन ने जन्म लिया। यह संगठन था राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ एक संगठन के रूप मं साम्प्रदायिकता को बढ़ाने में अधिक कारगर सिध्द हुआ।
  • जवाहर लाल नेहरू प्रधानमंत्री थे किन्तु पटेल गृह मंत्रालय का संचालन उनके आदेशानुसार नहीं, अपने मन के अनुसार करते थे और उसका इस्तेमाल सांप्रदायिक दंगो को शांत करने में नहीं उसे बढ़ाने में, राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ को बढ़ावा देने और मुसलमानों को दंगेबाज साबित करने में करते थे’

ü      केन्द्रीय स्तर पर अल्पसंख्यक तुष्टीकरण के अन्य प्रयास

  • समाज के अन्य सभी पंथों व समुदायों को शिक्षा हेतु ऋृणों पर 12-14 प्रतिशत अल्पसंख्यकों को ये ऋृण 3 प्रतिशत ब्याज पर ही मिल जाते हैं।
  • केन्द्रीय विद्यालय संगठन के प्रतीक चिन्ह सूर्य व कमल को क्रॉस व तारा युक्त अर्धचन्द्र में बदल दिया।
  • मदरसों को, जो किसी भी औपचारिक शिक्षण व्यवस्था के घटक नहीं है, केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा मण्डल की संस्थाओं के समान स्तर प्रदान कर दिया गया है।
  • वर्ष 2005 में संविधान की भावनाओं के विरूध्द जाकर अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में मुस्लिम छात्रों हेतु 50 प्रतिशत आरक्षण घोषित किया है।
  • अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय को भोपाल, पुणे, किशनगंज, मुर्शिदाबाद व मल्लपुरम में क्षेत्रीय केन्द्र खोलने हेतु 2000 करोड़ रूपयों का अनुदान दिया गया है। जिन राज्यों में ये केन्द्र खुल रहे हैं, उन्हें इनके लिये 500 एकड़ भूमि नि:शुल्क देने को कहा जा रहा है।
  • वर्ष 2004 में संयुक्त प्रगतिशील गठबन्धन सरकार के द्वारा अल्पसंख्यक शिक्षा आयोग का गठन किया गया है।
  • लोकसेवा आयोग की प्रतियोगी परिक्षाओं की तैयारी हेतु मुस्लिम प्रतियोगियों के लिये छात्रवृति का विशेष प्रावधान किया गया है।
  • दिनांक 20 जनवरी 2009 को भारत के उपराष्ट्रपति ने राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के वार्षिक सम्मेलन में सुझाव दिया था कि अल्पसंख्यकों के लिये एक केन्द्रीय कानून बनाने पर विचार करना चाहिए। अनुसूचित जाति तथा अनुसूचित जनजातियों के लिये बने अधिनियिम 1989 (अत्याचार रोकने सम्बन्धी) को अल्पसंख्यकों के लिये भी बनाने के लिये विचार करें।

ü                    विभिन्न राज्यों में अल्पसंख्यक तुष्टीकरण के प्रयास

  • राजस्थान में मात्र अभिभावकों के शपथपत्र पर अल्पसंख्यक छात्रों को पूर्व-माध्यमिक छात्रवृतियों दी जा रही है।
  • आंधप्रदेश सरकार द्वारा शिक्षण संस्थाओं में मुसलमानों के लिए 4 प्रतिशत आरक्षण किया गया है एवं समाज कल्याण विद्यालयों में अनुसूचित जातियों के लिए आरक्षित स्थानों में से 12 प्रतिशत स्थान मतान्तरितों के लिए निर्धारित कर उन जातियों को वंचित किया गया है।
  • तमिलनाडू सरकार द्वारा अन्य पिछड़ा वर्ग के आरक्षण में कटौती कर 7 प्रतिशत स्थानों को अल्पसंख्यकों के लिए आवंटित किया गया है।
  • पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा प्रत्येक विभाग के बजट में से 30 प्रतिशत का आवंटन मुसलमानों के लिए और सारी खाली पड़ी सरकारी भूमि मुसलमानों को आवंटित करने जैसे प्रस्ताव किया गया है।
  • बंगाल में ”अलीहा विश्विद्यालय” की स्थापना दिनांक 17 दिसम्बर 2007 सरकार के द्वारा कि गई है।
  • दिनांक 12.3.2008 को पश्चिम बंगाल के वित्ता मंत्री श्री असीम दासगुप्ता ने बजट एस्समेंट  (2008-09) को प्रस्तुत करते हुए कहां कि मेरा सुझाव है कि 200 अतिरिक्त उच्च माध्यमिक के मदरसे स्थापित किए जाए। मेरा यह भी सुझाव है कि 200 अतिरिक्त शिशु शिक्षा केन्द्र और 300 माध्यमिक शिक्षा केन्द्र भी उन क्षेत्रों में स्थापित किए जावे जहां अल्पसंख्यक समाज की बहुलता है।
  • बिहार सरकार द्वारा 4 जिलें – पूर्णिया, अरेरिया, कटिहार व किशनगंज – के 10वीं व 12वीं के मुसलमान छात्रों को शुल्क मुक्ति देने की घोषणा की है।

–  उसी प्रदेश में प्रत्येक 10वीं कक्षा उतीर्ण करने वाले मुसलमान छात्र को 10,000 रूपयों  का  उपहार दिया जा रहा है।

  • सच्चर कमेटी के क्रियान्वयन हेतु केरल में पोलोली समिति की सिफारिशों के आधार पर 5,000   मुस्लिम लड़कियों को फरवरी मास से स्नातक तथा स्नातकोत्तार के विद्यार्थियों को छात्रवृतियाँ दी गई। मुसलमान लड़कियाँ स्नातक तथा स्नातकोत्तार छात्राओं के लिये 5000 की छात्रवृति तथा व्यवसायिक विषयों के लिये 4000 की छात्रवृति प्राप्त करेंगी।

-पालोली मुहम्मद कुटी के  अनुसार अगले वर्ष मुस्लिम कन्याओं की छात्रवृति के लिये यह संख्या 5000 से 15000 तक बढ़ जायेगी।

– विभिन्न प्रतियोगी परीक्षा देने हेतु छात्रावास में रहने वाली मुस्लिम छात्राओं को 10,000 रूपयें तथा अध्ययन हेतु छात्रावास में रहने वाली लड़कियों को 1,000 रूपये छात्रवृति दी जा रही है।

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