भारतीय शिक्षा
मनुष्य में जो संपूर्णता सुप्त रूप से विद्यमान है उसे प्रत्यक्ष करना ही शिक्षा का कार्य है। स्वामी विवेकानन्द                      There are no misfit Children, there are misfit schools, misfit test and studies and misfit examination. F.Burk                     शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य आंतरिक शक्तियों को विकसित एवं अनुशासित करने का है। डॉ. राधा कृष्णन                      ज्ञान प्राप्ति का एक ही मार्ग है जिसका नाम है, एकाग्रता और शिक्षा का सार है मन को एकाग्र करना। श्री माँ

उच्च शिक्षा की दशा एवं दिशा

उच्च शिक्षा की दशा एवं दिशा


श्री अतुल कोठारी

सम्पर्क सूत्र :-9212385844, 9868100445

ईमेल :- atulabvp@rediffmail.com

स्वतंत्र भारत में उच्च शिक्षा का विस्तार व्यापक स्तर पर हुआ है लेकिन क्या यह हमारे देश की उच्च शिक्षा, छात्रों को जीवन दृष्टि देने में या उनकी भौतिक आवश्यकताओं की पूर्ति करने में सफल हुयी है। यह एक बडा प्रश्न है! देश की उच्च शिक्षा को शिक्षा की मूलभूत संकल्पना के साथ आधुनिक आवश्यकताओं के अनुसार ढालना होगा। इस हेतु इसके अनुरूप पाठयक्रम,पाठयचर्या की रचना हो। शोधकार्य को बढावा देने] शिक्षा की गुणवत्ताा बढाने, देश की शिक्षा मूल्य आधारित बने, शिक्षा स्वायत्ता हो, शिक्षा की आर्थिक व्यवस्था कैसे हो। इन सब चिंतनीय विषयों पर इस प्रारूप के माध्यम से सुझाव देने का प्रयास किया है।

उच्च शिक्षा का विस्तार

विश्वविद्यालय

महाविद्यालय

छात्र संख्या

शिक्षक संख्या

1947

18

518

2,28,881

24,000

2009

440

21000(लगभग)

1.2 करोड

4,90,000

पाठयक्रम एवं पाठयचर्या की पुर्नरचना

v पाठयक्रम की जडता( रेजीमेन्टेशन) को समाप्त करना।

v स्वतंत्रता पूर्व राष्ट्रीय शिक्षा आन्दोलन में

1. मानविकी शिक्षा, विज्ञान एवं तकनीकि शिक्षा के समन्वय की बात उठायी गयी थी। आज भी वह समयानुकूल है।

v सामाजिक कार्य को अनिवार्य करना- इस हेतु राष्ट्रीय स्तर पर एक आयोग का गठन किया जाय तथा उच्च शिक्षा के प्रत्येक संस्थान को गांवों से या शहरी झुग्गी झोपड़ी से जोड़ा जाय।

-हमारी सांस्कृतिक धरोहर एवं प्राचीन ज्ञान-विज्ञान की जानकारी दी जाय।

-व्यावहारिक तथा व्यसायिक शिक्षा को पाठयक्रमों में शामिल किया जाय।

v प्रत्येक तीन वर्षों में पाठयचर्या की समीक्षा अनिवार्य की जाय। छात्रों में समाज व देश के प्रति संवेदनशीलता जागृत की जाय।

v सामाजिक तथा नागरिक दायित्व का बोध हो।

v मूल्य आधारित शिक्षा का समावेश हो।

स्वतंत्र भारत में शिक्षा से संबन्धित सभी आयोगों,सभी पंथ सम्प्रदायों एवं महापुरूषों ने इसकी आवश्यकता को रेखांकित किया है।

– मूल्य शिक्षा हेतु अलग से पुस्तकों की आवश्यकता नहीं।उच्च शिक्षा में हर विषय की पाठयचर्या में ही मूल्यों का समावेश होना चाहिये।

किसी भी विषय की पाठयचर्या में शुरू में ही यह विषय पढ़ने के कारण के संदर्भं में जानकारी होनी चाहिये।उदाहरण- डॉक्टर…क्यो बनना चाहिये, इस संदर्भं में देश, समाज की आवश्यकता तथा रोगी की सेवा हेतु डॉक्टर बनना है इस प्रकार की संवेदना जागृत करने वाली पाठय सामग्री होनी चाहिये।

;डा. राधाकृष्णन आयोग-

-जीवनमूल्यों की शिक्षा -मौन प्रार्थना अनिवार्य करना।

– छात्रों की सुपर एनर्जी को चेनेलाईज करना।

– सामाजिक कार्य का पाठयक्रम हो।

– एन. सी. सी. को अनिवार्य करना।

– सांस्कृतिक धरोहर तथा प्राचीन ज्ञान-विज्ञान की जानकारी देना।

v            योग शिक्षा को अनिवार्य किया जाय।

v            खेलकूद, संगीत, एवं कला को पाठयचर्या में प्रमुखता से स्थान दिया जाय।

v            पाठयपुस्तकों में से इतिहास सहित सभी प्रकार की विकृतियों को शीघ्रताशीघ्र हटाया जाय।

v विज्ञान एवं अध्यात्म का समन्वय-

हमें केवल अपने राष्ट्र की अखण्डता ही सुरक्षित नहीं रखनी है-उसके साथ अपनी सांस्कृतिक परम्पराओं को भी अक्षुण्ण रखना होगा। समय आ गया है अब आध्यात्म और विज्ञान का समन्वय करने का। यह समन्वय ही हमें आण्विक युग में सुरक्षा प्रदान कर विकास की ओर उन्मुख कर सकेगा- डा. राजेन्द्र प्रसाद

भाषा

v            भारतीय भाषाओं के अध्ययन एवं अनुसंधान को प्रोत्साहन देना।

v            अन्य भाषा के उपयोगी साहित्य का भारतीय भाषा में अनुवाद हो।

v            उच्च शिक्षा में भी भारतीय भाषा माध्यम हो,सभी स्तर के उच्च शिक्षा के संस्थानों में अंग्रेजी की अनिवार्यता समाप्त की जाय।

v            संस्कृत की पांडुलिपियों के अध्ययन हेतु एक प्राधिकरण बनाया जाय।

शोध कार्य

शोध कार्य को बढ़ावा देना- शोध खर्च बढ़ाना, गुणवत्ताा बढ़ाना, देश एवं समाज की आवश्यकता के अनुरूप विषय पर शोध कार्य हो। भारत में रिसर्च एण्ड डेवलपमेंन्ट में 2.5 प्रतिशत खर्च किया जाता है जबकि चीन में 4 से 9 प्रतिशत धन  खर्च किया जा रहा है।   (यूनेस्को 2000)

v            मूलभूत विज्ञान के विषयों पर शोध कार्य कम हो रहे हैं इसको बढाया जाय। वैज्ञानिक अनुसंधान में भारत का हिस्सा 2.1 प्रतिशत है जबकि चीन का हिस्सा 14.7 प्रतिशत है।(यूनेस्को-2000)

v            शोध छात्रों के शोषण पर रोक लगायी जाय।

v            गलत प्रकार से हो रहे शोध कार्य पर रोक लगे।

शिक्षक की गुणवत्ताा बढ़ाने हेतु

v            बी. एड. का पाठयक्रम 4 वर्ष का समग्रता से हो।

v            स्नातक के बाद दो वर्ष का पाठयक्र्रम हो।

v            शिक्षण देने की पध्दति में बदलाव व विविधताएँ लायी जाय।

v            नियमित प्रशिक्षण व शिक्षण की व्यवस्था हो। और प्रशिक्षण में नैतिकता, व्यवसायिक निष्ठा एवं मूल्यों का समावेश हो।

-आधुनिक ज्ञान देना।

-कुशलता एवं क्षमता बढ़ाना।

-देश समाज की चुनौतियों की जानकारी एवं उसके समाधान हेतु चर्चा की जाय।

-शिक्षा देने का कार्य प्रोफेशन नहीं मिशन है।

अमेरिका में अध्ययन हेतु गये भारतीय प्रतिनिधि ने जब केनेडी से पूछा की अमेरिका इतना समृध्द है कारण क्या है! केनेडी का उत्तार था-

Every teachers in America Looks at

Every student of America as a future

President of America

शिक्षा की स्वायत्ताता

v            राष्ट्रीय स्तर पर स्वायत्ता शिक्षा प्राधिकरण का गठन हो। जिसका विस्तार प्रदेश एवं जिला स्तर तक हो।

v            स्वायत्ता के साथ जवाबदेही सुनिश्चित की जाय।

v            कुलपतियों की नियुक्ति राजनैतिक आधार पर न हो।

शैक्षणिक व्यवस्था सरकार के नियंत्रण से पूर्णरूप से मुक्त होनी चाहिए।शिक्षार्थी को किसी भी बाह्य हस्तक्षेप से मुक्त, उन्मुक्त वातावरण में विद्याध्ययन की व्यवस्था हो। विद्या केन्द्रों की व्यवस्था पर समाज का नियंत्रण हो, सरकार का नहीं- विनोवा भावे।

आर्थिक व्यवस्था

v            सकल घरेलु उत्पाद( जीडीपी) का 6 प्रतिशत शिक्षा पर तथा उसमें से 1.5 प्रतिशत उच्च शिक्षा पर खर्च हो।

v            सामान्यत: उच्च शिक्षा में रीकरिंग एक्सपेंडिचर के 20 प्रतिशत शुल्क के रूप में छात्रों से लिया जाय। ( पुनैया कमेटी)तथा व्यवसायिक शिक्षा में 30 प्रतिशत शुल्क छात्रों से लिया जाय।

v            सरकार उच्च शिक्षा के दायित्व से भाग नहीं सकती, इसकी सुनिश्चित व्यवस्था हो।

v            आर्थिक एवं सामाजिक दृष्टि से पिछड़े छात्रों के शुल्क की व्यवस्था सरकार व समाज करे।

v            योग्य छात्र पढाई से वंचित न रहे इसकी व्यवस्था हो। जो सक्षम है वह अधिक शुल्क दे-Those who can afford should pay.

v            विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय में शुल्क के अलावा भी आय के स्रोत का प्रयोग किया जाए।

-पूर्व छात्रों की संस्था बनाकर हर वर्ष उनका सम्मेलन किया जाय। तथा दानदाताओं की सूची बनाकर उनको संस्था से जोड़कर सहयोग लिया जाय।

– संस्था के भवन एवं व्यवस्थाओं का भी पूर्ण उपयोग करके आर्थिक संरचना खड़ी की जा सकती है।

उच्च शिक्षा के संदर्भं में अन्य महत्वपूर्ण सुझाव:-

v            छात्रों की सुपर एनर्जी को चेनेलाईज करना।

v            समाज व देश की आवश्यकताओं के साथ उच्च शिक्षा को जोड़ा जाय।

– मेन पॉवर सर्वे के आधार पर क्षेत्रिय एवं राज्यों के आवश्यकताओं के अनुसार संस्थान खोलें जायें।

v            शिक्षकों के रिक्त पदों की पूर्ति अतिशीघ्र की जाय।

v            परीक्षा एवं मूल्यांकन पध्दति में आमूलचूल परिवर्तन आवश्यक।

v            परीक्षा कार्य शिक्षा का हिस्सा ही माना जाय।

v            व्यवसायपरक शिक्षा को बढावा दिया जाय।

v            भारतीय शिक्षा सेवा की स्थापना की जाय।

v            शिक्षा में अल्पसंख्यक, बहुसंख्यक के आधार पर भेदभाव समाप्त किया जाय।

v            भारतीय इतिहास, संस्कृति, दर्शन एवं विभिन्न मत-पंथो का प्राथमिक ज्ञान सभी छात्रों हेतु अनिवार्य हो।

v            विभिन्न प्रकार की पारम्परिक चिकित्सा पध्दतियों के संरक्षण संवर्धन एवं सशक्तिकरण हेतु प्रभावी कदम उठाया जाय।

v            सभी प्रकार की निर्णय प्रक्रिया में छात्रों की सहभागिता सुनिश्चित की जाय।

–    इस माध्यम से उनका दायित्व बोध कराते हुए जिम्मेदार नागरिक बनाया जा

सकता है।


THE CONDITION  AND DIRECTION OF HIGHER EDUCATION


The higher education has become extremely wide spread in free Bharat but has the higher education of our country succeeded in providing a vision of life to  students and fulfilling their materialistic necessities? This is a critical question. Nation’s higher education is to be moulded according to the modern necessities and fundamental concept of an education. The curriculum should be designed accordingly. Encouragement of research quality enhancement of education let the education be value based and autonomous, how the education should financed. An effort has been made through this draft to suggest for all these subjects to be thought of extension of higher education

Year

University

College

No. of Students

Teachers

1947

18

518

228881

24000

2009

440

21000(Approx.)

1.20 Crore

49000

Reconstruction of curriculum.

Finishing the regimentation of the curriculum.

In the preindependence educational movement.

A point was raised regarding the adjustment of anthropology, Science and Technical education.

That is suitable to the time also today.

Making the social service compulsory- A national level commission be constituted and every institution of higher education be linked to the rural or urban slums.

Information to be given regarding our cultural heritage and ancient knowledge and science.

Practicable and vocational education should be included in the curriculum be compulsory in every three years.

Sensitivity is awakened among the students towards the society and the nation.

Knowledge  of the responsibility  towards society and citizens.

Value based Education be included.

In Free Bharat all the commissions, all the religions, sects, and the  great men  have underlined its necessity related to education.

Separate books are not needed for the Value education.

The Values should be included in the syllabus of every subject in higher education.

In the every beginning of the syllabus of any subjects information must be given with reference to its objective. For instance why one should  become a doctor to serve a patient and the society.

The syllabus material should be of such as to awake the sensitiveness of this kind.

Dr. Radha Krishnan Commission.

Education of values of life- Mute prayers be compulsory.

Channeling of super energy of the students.

  • Curriculum of social service
  • Compulsory N.C.C.Training.
  • Information regarding cultural heritage, ancient knowledge- Science.
  • Compulsory Yoga Education.
  • Games, Music and art should be given a prominent place in the syllabus.
  • All kinds of deformities should immediately be removed from the books including history. Co-ordination of Science and spirituality.
  • We have not only to safe guard our national integrity, side by side cultural traditions are also to be kept  uninterrupted..
  • Now the time has come to Co-ordinate the spirituality and science.
  • This co ordination only shall provide us safety in the atomic age and could lead us towards a development.Dr. Rajendra Prasad

Language

  • Encouraging the study and research of Vernaculars.
  • Useful literature of other languages  be translated into Bhartiya languages.

The Bhartiya  Language to be the medium for higher education. Compulsion of English at all levels of higher education must be stopped.

An authority should be established for the studying of manuscript of Sanskrit.

Research Work

Encouragement  of Research work- Increasing research expenses and quality. Let there be a research work on the subjects according to the necessity of Nation and society.

Merely- 2.5% of the budget is being spent for the research and development where as in China 4-9% of their budget is being spent. (UNESCO) The research work on the subjects of fundamental science is meager. Let this be enhanced. The contribution of Bharat in scientific is only 2.1% where as China’s share is 14.7% (UNISCO 2000).

The exploitation of the research scholars should be stopped. (The  research work). Misuse of research work should be stopped.

There should be an integrated course of B.Ed. for four years.

  • It must be of two years after graduation. Change and verities should be initiated in the teaching method. Regular training and Education should be arranged through expert trainers. Morality professional devotion and the values should be included in the training-
  • Imparting modern knowledge.
  • Increasing expertise and capacity.
  • There should be a discussion regarding the information and solution of the challenges before the country and society.
  • Education is a mission not a profession. A Bhartiya representative during his study in America asked Kennedy, “America is so prosperous, what is the reason? Kennedy Answered that- Every teacher in America looks at       Every student of America as future

President of America.

The Autonomy of Education

An autonomous educational Authority should be at nation level with its extension up to the state and district.

There responsibility should be fixed with the autonomy.

The involvement of politics must be avoided regarding the appointment of Vice Chancellors.

  • The educational set up should be entirely free from the government control.

The students should be free from external interference; the educational study  should be facilitated in a free environment. The management of the educational centers should be under the control of society and not the Govt. Vinoba  Bhave.

Financial Management

6% of G.D.P. should be spent on education and out of which 1.5% on higher education.

In general 20% of recurring expenditure on higher education should be recovered from students as a fee. 30% fee should be recovered from the students in Vocational education. The government cannot runaway from the responsibility of higher education, this should be determined.

  • The fee should be managed by the govt. or society for the economically and socially backward students.
  • There should be such an arrangement that the deserving students would not be depraved of the study. Those who can afford should be made to pay more.

Apart from fees, other sources of income should be used in colleges and universities.

An organization alumnus should be formed and an annual function should be held for a get together. A donor’s list should be prepared and by unifying their contribution should be sought.

Through the full use of building of Institution and its other facilities the funds can be raised.

The other Important suggestions referring to the Higher Education

  • Canalizing the super energy of the students.
  • The higher education should be linked with the society and the nation.
  • Institutions should be opened according to the necessities of regions and states based on ‘Man Power Survey’.
  • The teachers’ vacancies should be filled up as soon as possible.
  • A drastic change in the examination and evaluation method is essential. The Exams should be the part and parcel of an education.
  • Vocational education should be encouraged.
  • Bharteeya Educational services should be established.
  • The discrimination in education based on minority and majority should be abolished.
  • The fundamental knowledge Bhartiya history culture, Philosophy and many other creeds are essential for students.
  • Effective steps must be taken up for the conservation. Fostering and empowerment of various traditional methods of treatments.
  • The participation of the students in all kinds’ decision process should be well determined.
  • Through this activity they can be made responsible citizens by creating awareness among them.

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