भारतीय शिक्षा
मनुष्य में जो संपूर्णता सुप्त रूप से विद्यमान है उसे प्रत्यक्ष करना ही शिक्षा का कार्य है। स्वामी विवेकानन्द                      There are no misfit Children, there are misfit schools, misfit test and studies and misfit examination. F.Burk                     शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य आंतरिक शक्तियों को विकसित एवं अनुशासित करने का है। डॉ. राधा कृष्णन                      ज्ञान प्राप्ति का एक ही मार्ग है जिसका नाम है, एकाग्रता और शिक्षा का सार है मन को एकाग्र करना। श्री माँ

शिक्षा का उद्देश्य

आचार्य चाणक्य
आचार्य चाणक्य

जो माता व् पिता अपने बच्चों को शिक्षा नहीं देते हैं वे तो बच्चों के शत्रु के सामान हैं,

क्योंकि वे विधाहीन बालक विद्धानों को सभा में वैसे ही तिरस्कृत किये जाते हैं जैसे हंसों की सभा में बगुले|

आचार्य चाणक्य
ईसा पूर्व ३५० – २७५

स्वामी विवेकानंद
स्वामी-विवेकानंद

जिस शिक्षा से हम अपना जीवन निर्माण कर सकें, मनुष्य बन सकें, चरित्र गठन कर सकें और विचारों का सामंजस्य कर सकें|

वही वास्तव में शिक्षा कहलाने योग्य है

 

स्वामी विवेकानंदजनवरी १२, १८६३ – जुलाई ४, १९०२

भगिनी निवेदिता

भगिनी-निवेदिता

हमारी दृष्टि में शिक्षा ऐसी होनी चाहिए जिसमें प्राणोन्मेष हो। इसे एक सम्पूर्ण इकाई होना चाहिए। एक बालक को समूचे तौर पर समझना आवश्यक है- उसके हृदय को, मानसिकता और मनोरथों को। जब तक हम उसकी भावनाओं और रुचियों को दिशा प्रदान नहीं करते, जब तक उसे शिक्षित नहीं कहा जा सकता।

भगिनी निवेदिताअक्तूबर २८, १८६७ – अक्तूबर १३, १९११

महात्मा गाँधी
महात्मा-गाँधी

जीना है तो ऐसे जियो कि कल ही को मरना है। और सीखना है तो इस तरह से सीखिए जैसे कि आपको यहां हमेशा ही रहना है।

 

 

 

महात्मा गाँधीअक्तूबर २, १८६९ – जनवरी ३०, १९४८

डॉ राधा कृष्णन सर्वपल्ली
डॉ-राधा-कृष्णन-सर्वपल्ली

शिक्षा का उद्देश्य मात्र बौद्धिक स्वाधीनता नहीं है, इसका उद्देश्य हृदय और अन्तश्चेतना की मुक्ति है। बाहर दिखाई देने वाली मलिन बस्तियों की अपेक्षा मानसिक मलिन बस्तियां कहीं अधिक खतरनाक है।

बाह्य पर्यावरण में परिवर्तन लाने का क्या लाभ यदि हम मन में परिवर्तन नहीं ला पाते?

हमें स्वयं में परिवर्तन लाना होगा, और यदि हम चाहते है कि हममें परिवर्तन हो, तो यह प्रक्रिया हमें उन संस्थाओं में प्रारम्भ करनी होगी जो विद्यार्थियों की आवश्यकता की पूर्ति करती है।

डॉ राधा कृष्णन सर्वपल्लीसितम्बर ५, १८८८ – अप्रैल १७, १९७५

सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’

सूर्यकांत-त्रिपाठी-निराला

संसार में जितने प्रकार की प्राप्तियां हैं, शिक्षा उन सब से बढ़कर है |

सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’फरवरी २१, १८२६ – अक्तूबर १५, १९६१

दत्तात्रेय रामचंद्र बेन्द्रे
दत्तात्रेय-रामचंद्र-बेन्द्रे

जीवन में प्रत्येक वयक्ति से शिक्षा ग्रहण की जा सकती है|

 

 

दत्तात्रेय रामचंद्र बेन्द्रे
जनवरी ३१, १८९६ – अक्तूबर २६ १९८

दीनानाथ बत्रा
दीनानाथ-बत्रा

शिक्षा का उद्देश्य : ऐसी शिक्षा प्रणाली का विकास करना- जो

शारीरिक दृष्टि से सबल
प्राणिक दृष्टि से संतुलित
मानसिक दृष्टि से-सद्विचारी
बौद्धिक दृष्टि से-सत्यान्वेषी
तथा
आत्मिक दृष्टि से सेवाभावी हो

दीनानाथ बत्रा
१९३२

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